कुछ फैसले लेने में डर सा लगता है,
दिल और दिमाग में छिड़ी जंग को रोकना आसान कहां होता है।
क्या सही है क्या गलत ये किसे पता होता है,
लिए गए फैसलों पर भी शक सा रहता है।
कुछ उलझनों को सुलझाने में वक़्त लगता है,
उलझने सुलझ भी जाए फिर भी मन में डर सा लगता है।