न जाने क्या ढूंढ रहे हो खुद में
लगता है गहरे राज़ छुपाए घूम रहे हो।
जो समझ ना पाए तुम्हे कभी
क्यों उन्हें समझाने में लगे हो?
जो समझ लेते है तुम्हे
क्यों उनसे दूर भाग रहे हो?
जो खड़े है हर मोड़ साथ तुम्हारे
क्यों उनसे नज़रे फेर रहे हो?
मानो या ना मानो
उनके होने से ही तुम पहले से बेहतर लग रहे हो।