काश शब्द से भी अजीब सा लगाव हो गया है,
खुशियों में भी ज़ुबान पर रहता है और मुश्किलों में भी।

थोड़ा इंतज़ार ज़रूरी है

सुनी सड़कों पर वापस शोर गूंजेगा, थोड़ा इंतज़ार ज़रूरी है ।
हर मोहल्ले की रौनक लौटेगी , थोड़ा इंतज़ार ज़रूरी है।
बाजारों की चहल पहल फिर दिखेगी , थोड़ा इंतज़ार ज़रूरी है ।
फिर से सजेगी यारो की महफ़िल , थोड़ा इंतज़ार ज़रूरी है।
अद्भुत होगा जीत का नज़ारा , थोड़ा इंतज़ार ज़रूरी है।

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खामोशियों में बहुत सी बातें दबा लेते है हम,
कहना तो बहुत कुछ चाहते है लेकिन कह नहीं पाते है हम,
कभी कभी मन की बात किसी से साझा नहीं कर पाते है हम
लेकिन चंद लोगो की समझ में आ जाते है हम ।

क्यों इतना सोच रहे हो तुम

कल क्या होगा क्या नहीं, क्यों इतना सोच रहे हो तुम,
आज में जीना क्यों भूल रहे हो तुम ।
किस्मत में क्या लिखा है क्या नहीं,  क्यों इतना सोच रहे हो तुम,
जो लिखा है वो तो हो कर रहेगा, क्यों अपनी चिंताएं बढ़ा रहे हो तुम ।
ख्वाब जो तुम बुन रहे हो वो पूरे होंगे या नहीं , क्यों इतना सोच रहे हो तुम,
अपनी ज़िन्दगी को एक जंग की तरह क्यों जी रहे हो तुम ।

कोशिशें जारी है

मंज़िलो को पाने की कोशिशें जारी है,
रास्ते में मिल रही है मुसीबतें लेकिन कोशिशें जारी है,
डगमगा रहे है मेरे कदम लेकिन मुस्कुरा कर हर चुनौतियों को जीतने की कोशिशें जारी है ।

ज़िन्दगी

तु सिखाए जा रही है ,
मै भी सीखती जा रही हूं ।
जिस राह पर तु ले जा रही है ,
बस वहीं जा रही हूं ।
कभी ना थकने दूंगी मेरे कदम ,
अपने सपनों की तरफ बढ़ती जा रही हूं ।